चाय की दुकानों पर छाई रही मोदी की रैली

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की चाय वाले की पृष्ठभूमि को लेकर खूब चर्चा हो रही है। रविवार को मोदी की देहरादून रैली को धर्मनगरी के चाय वालों ने टीवी पर बड़े गौर से देखा-सुना।

हरिद्वार की चाय की दुकानें मशहूर
चाय की दुकानों पर सुबह से शाम तक मोदी की रैली को लेकर चर्चा होती रही। राजनीति, धर्म या फिर अन्य कोई विषय हो। बौद्धिक चर्चाओं को लेकर हरिद्वार की चाय की दुकानें खूब मशहूर रही हैं।चाय की दुकानों पर बौद्धिक चर्चाएं करने वाले लोग देश-दुनिया में नाम कमा रहे हैं।

कनखल में होली चौक पर रुप्पी चाय वालों को कौन नहीं जानता। चाय की दुकान चलाने वाले रूपचंद बौद्धिकों के सान्निध्य में ऐसे बैरागी बने कि रुप्पी चाय वाले से मौनी बाबा बन गए और सांस्कृतिक राजधानी उज्जैन जा बसे।

आज मौनी बाबा देश के संतों में एक बहुत बड़ा नाम है और कनखल के ही सुमन भाई उनके शिष्य के रूप में कथा के क्षेत्र में विश्वविख्यात हो गए। अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह जैसे मौनी बाबा के अनेक शिष्य रहे हैं।

रूपचंद जब कनखल में चाय की दुकान चलाते थे, तब उनकी दुकान पर हिंदी के पाणिनी आचार्य किशोरीदास वाजपेयी प्रतिदिन आकर बैठा करते थे। शामलाल शर्मा इसी दुकान पर चाय पीते-पीते दिनमान के प्रतिष्ठित संपादक बन गए।

कृष्णचंद्र शर्मा भिक्खू यहां हर शाम बैठते थे और आगे चलकर आकाशवाणी के केंद्रीय महानिदेशक बने। देश में समाजवादी आंदोलन के अगुआ रहे एमएन राय ने कनखल के अपने साथी सोमदत्त शर्मा के साथ रुप्पी चाय वाले की इसी दुकान पर महीनों बिताए।

समाजवाद का चिंतन इस दुकान पर खूब हुआ। कनखल के बौद्धिकों के लिए फत्तू जलेबी वाले की तरह रुप्पी की दुकान भी आकर्षण का केंद्र तब तक बनी रही, तब तक रूपचंद्र मौनी बाबा बनकर उज्जैन न चले गए।

चंडूखाने पर बौद्धिकों का लंबा जमघट
हरिद्वार में ललतारौ पुल के समीप गोपाल रावत की चाय की दुकान कईं दशकों से बौद्धिकों और नेताओं के लिए आकर्षण का केंद्र रही। इस दुकान पर बैठकर बालकवि बैरागी और कन्हैयालाल नंदन जैसे प्रख्यात कवियों ने अपनी रचनाएं लिखी भी हैं और सुनायी भी हैं।

वे जब भी हरिद्वार आते थे, बौद्धिकों का केंद्र रही उस दुकान पर चाय अवश्य पीते थे। इसी दुकान पर बैठकर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक प्रेस विज्ञप्तियां लिखकर समाचार पत्रों में वितरित किया करते थे।

भगत सिंह कोश्यारी, हरक सिंह रावत, वर्तमान केंद्रीय मंत्री हरीश रावत, गांववासी, किशोर उपाध्याय, दिवाकर भट्ट, पूरणसिंह डंगवाल आदि अनेक नेता इसी दुकान पर चाय पीते हुए राजनैतिक बैठकें करते रहे।

विख्यात कार्टूनिस्ट हरिश्चंद्र काक ने चाय की इस दुकान पर बैठकर दर्जनों कार्टून बनाए। माया के संपादक पुष्कर पुष्प ने इस दुकान पर बैठकर कईं कहानियां तैयार की। इस दुकान का उपयोग चूंकि नगर का मीडिया काफी हाउस के रूप में करता था।

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